रामायण - मंचन (दिवस - ५ )

भारतीय संस्कृति के प्रचार प्रसार के सभी उद्देश्यों की पूर्ती के लिए ‘रामायण मंचन‘ से उत्तम कोई साधन नहीं हो सकता ।  हमारे शैक्षणिक संस्थान ने इसी महान  उद्देश्य की पूर्ती का भार फूलों से कोमल अपने बच्चों को सौंपा ।

यह अति हर्ष एवं गर्व का विषय है की रामायण में जिन मानवीय मूल्यों , त्याग , कर्तव्य , नीति , धर्ये , प्रशासन व्यवस्था , लोक -  कल्याण , पारिवारिक - संबंधों के आदर्श को प्रस्तुत किया गया है , उसे हमारे अध्यापक  एंव  बच्चे संप्रेषित करने में पूर्णत  सफल रहे हैं ।

आज के प्रसंगों में लक्ष्मण -   मूर्छा , हनुमान का संजीवनी लाना , युद्ध का आरम्भ , मेघनाथ - कुम्भकर्ण वध , राम - रावण युद्ध और उसके वध के साथ बुराई पर अच्छाई और सच्चाई की विजय का जयघोष करते अयोध्यावासियों का दीपावली उत्सव मानना , भारत - मिलाप मुख्य है ।

अंततः राम राज्याभिषेक और राम गुणगान के साथ जीवन का एक आदर्श प्रस्तुत करते हुए इस कार्यक्रम  का  समापन किया गया ।

इस प्रयास द्वारा बच्चों ने खेल - खेल में मानवीय मूल्यों को पहचाना ।  कहना न होगा , अपने अद्भुत अभिनय द्वारा बच्चों ने सभी के हृदय पर अमिट छाप छोड़ी ।

October 21, 2019